India’s education system 🚫

ज मैंने अपने दर्द को बयान करने की सोची , पर डर था कही लोग इसका विरोध न करे , आप भी जानना चाहते होंगे मेरा दर्द , तो सुनिये–

मुझे या कोई भी जो विद्यार्थी जिसने भारत के किसी भी प्रदेश के बोर्ड से शिक्षा ग्रहण की है , उसे इस बात का मलाल जरूर होगा , कि जिस शिक्षा पद्धति से वो पढ़ रहा है , उस शिक्षा का वास्तव में कोई उपयोग नही हो पाता है । तो क्यों हम इस शिक्षा पद्धति को अपनाये हुए है ।कुछ लोगो को कहते हुए सुना है कि भारत के लोग आलसी होते है, इसीलिये चाइना अमेरिका , रूस को पीछे नही कर पाते, पर अगर यह सच्चाई होती तो उसी भारत देश के बच्चे विदेशो में बड़ी बड़ी कंपनियों के मालिक या सीईओ नही होते। क्यों भारत में वही लोग कुछ बड़ा नही कर पाते और वही लोग विदेशो में सफलता के झंडे गांड़ देते है । इसका कई कारण है यहाँ की शिक्षा पद्धति , यहाँ के अवसरों में कमी , यहाँ की सरकारो की इच्छाशक्ति में कमी ।

पहले बच्चा क्लास 8 तक 10 विषय पड़ता है , उसके बाद वह हाईस्कूल में 6 , उसके बाद 12 में 5 विषय , और स्नातक में 3 और परास्नातक में 1 विषय ।

अगर यह हम यह न कर के विदेशो की तर्ज पर उन्हें 8 के बाद एक विषय चुनने की आज़ादी दे जिसे वो 4 साल तक पढ़े , उसके बाद उन्हें एक टॉपिक दे दे जिसमे वो स्नातक कर सके । तो अब आप ही बताइये की कौन सा बच्चा रिसर्च के लिये ज्यादा तैयार होगा।

असल में सबसे बड़ी समस्या यह है कि यहाँ इंजीनियर, डॉक्टर वकील , प्रशासनिक अधिकारी , बैंकिंग या किसी भी क्षेत्र में जाने के लिये एक जैसी इंटरमीडिएट परीक्षा प्रणाली से गुजरना पड़ता है , जब लाइन अलग अलग है तो प्रकिया एक जैसी क्यों , इंग्लिश सबको पड़नी है , हिंदी सबको पड़नी है क्यों भाई भाषा का ज्ञान चलो ठीक है पर इसको अनिवार्य करने का मतलब नही समझ आया ।

भारत में मेरे हिसाब से सबसे ज्यादा घोटाले शिक्षा के क्षेत्र में होते है , सरकारी स्कूल में सिर्फ खाना मिलता है और वो भी ऐसा की जानवर भी बीमार हो जाये।

अच्छे स्कूलों में भी ज्ञान नही नंबर लाना सिखाया जाता है । अच्छे स्कूल में नियम पढ़ाये जरूर जाते है पर उनका प्रयोग नही सिखाया जाता है ।

प्राचीन समय में गुरुकुलो में तीर चलना , भोजन बनाना , शस्त्र एवम् शास्त्र का ज्ञान दिया जाता था । उस समय प्रयोगात्मक ज्ञान का इतना मंहत्व था परंतु अब तो लैब बच्चा ग्रेजुएशन में आकर देखता है । मैंने भी मुश्किल से इंटरमीडिएट में कुछ 3 से 4 प्रयोग किये है अब आप बताइये कि मैं साइंस के विषयो मे क्या प्रगति कर पाउँगा , मेरे पास तो सिर्फ किताबी ज्ञान है पर उसका प्रयोग?

कहते है कि किसी देश को अगर प्रगति करनी हो तो उसे स्वस्थ और ज्ञान से परिपूर्ण होना चाहिये , पर यहाँ तो स्वास्थ्य सुविधाओं से आदमी वंचित है वो पढेगा क्या , हज़ारो बच्चे भूख और बीमारी से मर रहे है ।

जब स्वस्थ होगा तभी तो पढेगा इंडिया और जब पढ़ेगा तभी तो बड़ेगा इंडिया ।

अब आप यूपी बोर्ड को ही ले लीजिए यहाँ पर पहले तो बच्चा इंटरमीडिएट हिंदी में पढता है उसके बाद ग्रेजुएशन इंग्लिश भाषा में करता है और मिथ्या तो देखिये 50 साल से ऐसा होता आ रहा है पर तकलीफ किसी को नही है । शायद हमारे सीनियर ज्यादा टैलेंट होंगे तभी तो उन्हें इससे समस्या नही हुई होगी पर भाई मुझे तो हुई ।

सर अल्बर्ट आइंस्टीन ने भी कहा था जब सबकी क़ाबलियत अलग अलग है तो उनका सिलेक्शन एक जैसी प्रकिया से कैसे कर सकते है ।

कुछ लोग कहते है यहाँ डांस का ,एडवेंचर का, गेम्स का टैलेंट नही है, भाई अब बच्चे से मार्कस ही ले लो वो बेचारा ओलंपिक कहा से दे पायेगा , वो देश का नाम कैसे रोशन कर पायेगा । कहने को तो यहाँ के पेरेंट्स भी कैरियर चुनने की आज़ादी देते है पर आप्शन इंजीनियर , डॉक्टर , आईएस , या बैंकिंग ।

क्यों आप के लिये डांस , सिंगिंग ,मॉडलिंग, फोटोग्राफी , एक्टिंग कैरियर नही है ।  गलती उनकी भी नही है वो भी उस प्रकिया से गुजरे है न । पर तकलीफ की बात यह है कि जब उनके सपने मर रहे थे तब उन्होंने यह सोचा था कि मैं अपने बच्चों को कैरियर चुनने की आज़ादी दूँगा पर जब समय आया तब वो भी बाप बन गए।

भारत में अन्य देशों की तुलना में शिक्षित लोगों का प्रतिशत काफी कम है । इग्लैंड, रुस तथा जापान में लगभग शत-प्रतिशत जनसंख्या साक्षर है । यूरोप एवं अमेरिका में साक्षरता का प्रतिशत 90 से 100 के बीच है जबकि भारत में 2001 में साक्षरता का प्रतिशत 65.38 है । ये आंकड़े है हमारी शिक्षा के ।

भारत में इंग्लिश बोलने वाले को पढ़ा लिखा माना जाता है , और हिंदी में बात करने में शर्म आती है । मैं उस पर बहस नही चाहता हूँ पर एक सर्वे के अनुसार हिंदी बोलने समय दिमाग ज्यादा चलता है ।

अब आपसे मैं पूछता हूँ, आप बताओ की इस समस्या का सही हल क्या है । अपनी राय कमेंट बॉक्स में लिखे ।

या मुझे मेल भी कर सकते है

Email~dreamsmaker.hs@gmail.com

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स्वतन्त्रता दिवस (कुर्बानी के 70 साल) 

शहीदों की चिताओ पर लगगे हर वरस मेले , वतन पे मरने वालो का यही बाकी निसाँ होगा

 

स्वतन्त्रता दिवस, बचपन से यह दिन हम सब के लिये खास दिन होता है , यही एक पर्व है जो भारत में सभी साथ मिलकर हर्ष और उल्लास के साथ मानते है । 

स्वतंत्रता क्या सच में आज हम इसके मायने समझ रहे है कुछ मेरे भाई बन्धु लोगो को मेरे भारत में कई समस्याये दिख रही है उन्हें यह मुल्क टूटता हुआ नज़र आ रहा है तो मैं ऐसे लोगो से थोडा नाराज़ भी हूँ और थोडा खुश भी । खुश इस लिये की कम से कम चिंता में ही सही मुल्क की परवाह तो करते है पर ऐसे लोग यह भूल जाते है की यह मुल्क सीमाओ से नही बल्कि अपनी संस्कृति के कारण जुड़ा हुआ है । मुझे बड़ी पीड़ा हुई कि एक मेरे मित्र देश को अब भी गुलाम बता रहे थे , शायद आज भी वो आजादी का मतलब और इसका महत्व नही जान पाये , जो भाई लोग ऐसी चिंता कर रहे है देश की ,अगर आज़ादी नही होती तो आज इस तरह के विचारो के लिये आपके पास ऐसी सोच समझ नही होती , अगर आज़ादी नही होती तो आज भी मैं सिर्फ अपने बारे में सोच रहा होता , ये ड्रीम मेकर्स ये एनजीओ ये समाज सेवा जैसे शब्द न उपस्थित होते । 

सदा ही लहराता रहे ये तिरंगा हमारा,सारे जहां से अच्छा हिन्दुस्तान हमारा ।”

वह बात अलग है कि जब तक यह पृथ्वी है तब तक हमारे और समाज के बीच हज़ारो जंगे चला करेगी पर इसका यह मतलब नही की हम आज़ाद नही है । एक राष्ट्र के लिए परिवर्तन और सुधार बहुत जरुरी है । लोगो का तो पता नही पर मुझे बहुत आश दिखती है मेरे मुल्क में । 

इन 70 सालो में भारत ने बहुत सी लड़ाईया खुद से लड़ी है । फिर चाहे वो पाकिस्तान से जंग हो या साइंस में मुकाबला , हम हर चीज़ में अव्वल आये है । भारत के इसरो द्वारा 104 उपग्रह एक साथ भेज कर वा एक साथ कई रिसर्च कर इस देश का मान बढ़ाया है । डीआरडीडीओ ने स्वदेशी हथियार बना कर भारत का मान बढ़ाया है । हमारी सेना हमारी इंटेलिजेंस एजेंसीज हमारे साइंटिस्ट हमारे डॉक्टर हमारे इंजीनियर ने एक से एक बड़े कारनामे कर के पूरी दुनिया में भारत का परचम लहराया है । यही नही हमारे देश के विद्याथियों ने पूरे विश्व् में तिरंगे का मान बढ़ाया है । 

गंगा यमुना यहाँ नर्मदा,मंदिर मस्जिद के संग गिरजा, शांति प्रेम की देता शिक्षा, मेरा भारत सदा सर्वदा..!!

भारत ही एक मात्र देश है जहाँ हिन्दू ,मुस्लिम सिख, ईसाई सब साथ मिल कर रहते है । हा कुछ मामले होते है जब कुछ मतभेद हो जाते है तो ऐसे लोगो के लिए कुछ पंक्ति एक दोस्त ने भेजी  है ।
 “मुकम्मल है इबादत और मैं वतन ईमान रखता हूँ,वतन के शान की खातिर हथेली पे जान रखता हूँ !!क्यु पढ़ते हो मेरी आँखों में नक्शा पाकिस्तान का ,मुस्लमान हूँ मैं सच्चा, दिल में हिंदुस्तान रखता हूँ

यह मुल्क प्यार और अमन का प्रतीक है । बस आप लोगो से यही दुआ है कि जिस तरह से स्वतंत्रता के लिये लाखो लोगो ने जान दी है , इस देश को 70 सालो से प्रगति के मार्ग पर बढ़ाया है उसी तरह से आगे भी यह करवा जारी रहेगा । 

दे सलामी इस तिरंगे को ,जिस से तेरी शान हैं,सर हमेशा ऊँचा रखना इसका, जब तक दिल में जान हैं ।

भारतवासी और उसके प्रयासों को कुछ कमियों के कारण नही नकारा जा सकता है । कुछ समस्याये है जिनसे अभी लड़ना है जैसे जल्द ही में गोरखपुर हादसा हुआ है , काफी लोगो में गुस्सा है , मुझमे भी है पर यह गुस्सा देश में सुधार कर के निकालना है या फिर सिर्फ चीख कर इसको कोस कर ।

भारत में ऐसी हजार वजह है जिसके कारण इस देश के लिये म


रने का मन करता है । 



तो आईये प्रण लेते है की जिस तरह  हमारे पूर्वजो ने इसे हर चीज़ में टॉप 3 या 4 में पहुचाया है , हम इसे नंबर 1 पर पहुचायेंगे । 

मैं भारत बरस का हरदम अमित सम्मान करता हूँ,यहाँ की चांदनी मिट्टी का ही गुणगान करता हूँ,मुझे चिंता नहीं है स्वर्ग जाकर मोक्ष पाने की,तिरंगा हो कफ़न मेरा, बस यही अरमान रखता हूँ ।

जय हिन्द जय भारत , वंदे मातरम् 
हर्ष सुधीर शुक्ल (ड्रीम मेकर्स टीम) 

बाल श्रम ( एक अभिश्राप )

वो जो हर रोज ख्वाबो को नज़दीक से देखता है और महसूस करता है,

जब वह देखता है,सुबह अच्छे अच्छे कपड़े पहने स्कूल जाते बच्चो को ,

धीरे धीर स्कूल बस में चढ़ते बच्चो को ,

देखता है वो सपने नज़दीक से ,

मन उसका भी करता है,स्कूल जाने को ,

टिफिन में बढ़िया खाना ले जाने को,

दोस्त बनाने को,

सब कुछ पढ़ने को ,

सब कुछ याद करने को ,

सब कुछ याद रखने को,

देखता है वो सपने बड़ी नजदीक से , (होटल की कोने वाली मेज साफ करते हुए )
देखता है वो दिन भर की भाग दौड़ को नजदीक से ,

वो भी भागना चाहता है,

वो भी खेलना चाहता ,

वह भी उड़ती पतंग की तरह उड़ना चाहता है,

वह देखता है नजदीक से हम उम्र बच्चो को ये सब करते हुए ,

वह देखता है सपने बड़ी नजदीक से ।

आज होटल में एक बच्चा आया है,पूरा होटल बुक किया है माता पिता ने ,शायद जन्मदिन है बच्चे का,किस्मत है बच्चे की ,माता पिता का लाड प्यार है,केक कटता है,खुशियां बटती है,बच्चे के दोस्त उछल कूद मचाते हैं।

फिर वो देखता है अपने सपने नज़दीक से ,(बर्तन माँझते हुए ) ।बात उसी “‘छोटू’” की हो रही है जिसे आप सबने भी देखा है बड़ी नजदीक से ।


Kailash Satyarthi (b.India) Nobel Peace Laureate 2014.And Honrary chair person of Global March against Child Labour.He founded The ‘BACHPAN BACHAO ANDOLAN’ in 1980 and has acted to protect the rights of more than 83000 children from 144 countries.


खैर छोड़ो बता ये रहे थे कि ऊपर की बातें ‘काल्पनिक ‘हो सकती हैं पर नीचे वाली बात काल्पनिक नही है ।ये वास्तविकता है ।

#writer– Shashank mishra

Link~www.sociopandit.WordPress.com

बस यही सपना है हम लोगो का जो बच्चों के हक़ है , उन्हें दिलाये । कोई बड़ा इरादा नही है बस कोई भी इंडिया में रोटी और ज्ञान की कमी से न मरे। दोस्त बस उम्मीद है की इस काम में मुझे कभी अकेले नही चलना पड़ेगा जो ड्रीम मेकर्स ने शुरू किया है उसे मिलकर अंजाम तक पहुचायेंगे । 

ब्लॉग पढ़ने के लिए दिल से शुक्रिया । 

#हर्ष शुक्ल (ड्रीम मेकर्स )

MULTI TASKING EXAM @HARGOWN

ड्रीम मेकर्स टीम  ने  एक जनरल नॉलेज प्रतियोगिता का आयोजन किया है जिसमे क्लास ६ से परास्नातक तक के विद्यार्थी भाग ले सकते है इस प्रतियोगिता का आयोजन तीन वर्गों में किया गया है ।

पहला वर्ग  ~ कक्षा ६ से ८

दूसरा वर्ग  ~ कक्षा ९ से १२ 

तिसरा वर्ग ~ स्नातक से परस्नातक्


हमारा उद्देश्य केवल यह है की जो बच्चे सीधे प्रतियोगी परीक्षा देने जाते है उनके कई कठिनाईयो का सामना करना पड़ता है इस लिए उनके एक अनुकूल  वातावरण मिले जिससे वो अपनी पढ़ाई के साथ साथ प्रतियोगी परीक्षा के लिए भी तैयार हो । इसी उद्देश्य के साथ इस जनरल नॉलेज प्रतियोगिता का आयोजन किया गया है । यह प्रतियोगिता हरगांव  मे ३० अप्रैल को आयोजित की गयी है जिसमे आप प्रतिभाग कर सकते है । अधिक जानकारी के लिए संपर्क करे। संपर्क सूत्र ~ 8601000603, 8795569799 


महानता कभी ना गिरने में नहीं है, बल्कि हर बार गिरकर उठ जाने में है

Education tips #can I help u ???

  • Pehle toh aap SB ko happy new year advance #pehle apna introduction de du  I am harsh shukla , student and social worker … Jaise ki aap ko pata hai ki dream makers joh ki meri life ka ek hissa hai usse Jude experience share karta hu 
    .. 

Sayad apko na pata ho PR aaki success aur unsuccess ke bech sirf ek cheez hai apki soch saara khel apki soch ka hai aksar logo ke saath kya dekha hai mehnaat khub karte hai PR result unhe nhi milta kabhi socha kyu ?? Reason hai ki unhe kaam toh karna toh hai PR tarika nhi pata .. Example aap car driving sikhna chahte hai yeah kya apki icha hai toh aap kya karoge dad ki car lekar akele nikal loge ya pehle driving rule padaoge kisi ache driver ke saath training loge usme bhi pehle usse dekhoge uske baad dheere dheeree car chalana seekoge .. Bus yahi cheez har cheez PR lagu hoti hai AGR aapko koi kaam karna toh pehle uske baare mea jaano phir Jo USS mea expert hai uski help lo aur dheere dheere speed badao AGR yeah nhi karoge toh kya hoga excident hoga MATLAB aapko result ya toh nhi milega aur AGR mila bhi toh itna nhi jitna aap desarve krte hai … Toh karna kya purri tayari ke saath purre mood mea purre weapons ke saath..
Ek aur prblm Jo aksr dekhta hu log kahte hai sirf mehnaaat kro ghar wale kahete hai padao beta result milega toh aise parents se ek baat karna chauga sir aap ne kitna pada aur kitna result mila hard work is not key of success .. Aur fir kaha hoti hai itni padai mujhse nhi hooti AGR khub pade bhi toh kya  fayada MATLAB hammer padna PR sirf utna Jo hamarre kaam hai #plz google baane ki kosis na kro joh karo dil se Sahara gyan sookne ki jarurat nhi kuch dusro ke liye chood do bhai . matlab hai bahut kuch hai PR mera knowledge sirf mere kaam project competition tk hona chaiye kyuki AGR aap jayada knowledge lete ho toh mai manta hu ki ko kaam aayega PR haamme krna kya ki kaam kam aur result jayda kyuki yahi demand hai … 

Kuch bade log sayad meri baat se sehmat nhi hoge PR mujhe yeah shi lagta hai .


.

  • Toh sabse bada kaam kya karna hai social media se duri banai hai duri matlab yeah nhi account delete kr diya aur book utha ke lg gye .. Kuch nhi honewala isse kyuki pata nhi kitni baar mera account delete kiya hai aap uska use kam kro aur adaat aur takkat apne hisaab se banao kyuki aapko aapse behtar koi nhi janta … 
  • Jin logo ko mere vichar shi lage woh iss post ko share kare aur AGR koi question jiske jawab mea help chaiye kyuki solve apko krni hai 
  • My mail- dreamsmaker.hs@gmail.com / http://www.dreammaker1.WordPress.com

What is dream makers??

Life mea har ensaan kuch karana chatha hai meri kawhish
bhi unse alag nhi thi . PR ek cheez Jo khud mujhe lagti hai ke har har ensaan apne aap mea ek misaal hai mujhe dream makers ki soch tb aayi jb Maine life mea problem face krna suru kiya uss din Maine decide liya ki jo problem mujhe aa rhi hai woh mere junior ko nhi aani chaiye .. PR karta bhi kya age choti thi .. Tabhi ek din mere ek friend me mujhe sandeep maheswari ki ek video dikayi .. Woh video dekar kr mujhe ahsaas hua ki nhi yaar chota hu tabhi toh sahi hai bade PR toh sabhi kr sakte hai .. Ab mujhe pata nhi tha mai kya karu PR Etna toh pakka ho gya tha ki kuch karna hai kaise pata nhi .. Fir Maine yeah baat apne dosto ko batayi unhone ese mera roz ki trah ka Naya sokh samja .. Galti unki bhi nhi hai fir jb unhe yeah laga ki mai ess bar serious hu toh unhone kaha calo theek hai par suru kaha se kare .. Maine socha student se judne ka sabse acha traika hai exam kyuki har bacha exam deta hai aur yeah aisa traika tha jisse hm ek saath badi suruat kar sakte the ..  Kher Maine kuch din tak yeah program postpone kiya tabhi meri baat ise tropic PR Shashank mishra se hui joh mera cousin hai .. Usne kaha bhai idea acha hai aur usne apne local ke ladko ke saath milkar general Knowledge competition organize kr diya .

Uss exam mea 300+ student aaya yeah hamare liye bahut badi baat rhi

Fir maine yeah general knowledge competition apne homtown biswan mea karne ki sochi dosto ki madad se hamne exam karwaya aur uss exam mea 450+ student aaya .. Mujhe uss din ek baat pr vishwas ho gya ki manzil koi namukin nhi uss ki aur kadam bada kr toh dekh agr sachi hai lagan teri toh manzil baag kr tere pass aayegi ..

Likne ko toh bahut kuch hai aur karne ko bhi .. 

Last line ke saath

Listen to your teachers when they tell you WHAT to do. But more importantly, think about it later and ask yourself WHY they told you to do it

Bye dosto aage ki kahanni agle blog mea… fallow kare AGR sahamt ho..

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